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Hormones (हार्मोन)

हार्मोन (Hormone) शरीर की किसी अंतः स्रावी ग्रंथि में उत्पन्न होने वाला तथा रक्त के साथ भ्रमण करता हुआ अन्य किसी अंग या उत्तक में पहुंचने वाला एक रासायनिक संदेश वाहक है। 

जो उस अंग या ऊतक पर क्रिया करके कर के उसकी क्रियाशीलता को बढ़ा देता है,  कम कर देता है। हार्मोन अति सूक्ष्म मात्रा में उत्पन्न होते हैं और प्रत्येक हार्मोन का एक निश्चित कार्य होता है। हार्मोन रक्त में सामान्य से कम या अधिक होना दोनों ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
Hormones (हार्मोन)
Hormones (हार्मोन) 

हार्मोन के कार्य:

हार्मोन शरीर की वृद्धि में सहायक होते हैं।
यह शरीर के रोगों से रक्षा करते हैं ।
मेटाबोलिज्म को तथा पाचन संस्थान श्वसन संस्थान रक्त परिसंचरण संस्थान  आदि संस्थानों के कार्यों को प्रभावित करके स्वस्थ बनाए रखते हैं।
हार्मोन जनन स्रावों को प्रभावित करते हैं।

वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone -GH) or सोमेटोट्रॉपिक हार्मोन (Somatotrropic Harmone): 

यह शरीर की वृद्धि के लिए आवश्यक हार्मोन है, किसी भी सिस्टम लक्ष्य को प्रभावित करने के बजाय यह हार्मोन वृद्धि से संबंधित शरीर के भागों को प्रभावित करता है। 

यह वृद्धि की दर को बढ़ाता है और जब एक बार परिपक्वता की स्थिति निर्मित हो जाती है तक उसे बनाए रखता है।

इस हार्मोन के रक्त प्लाज्मा में सामान्य से बहुत कम होने पर शरीर में वृद्धि नहीं होती और बौनापन नामों की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। और इस हार्मोन के रक्त प्लाज्मा में सामान्य से अधिक होने पर महाकायता उत्पन्न हो जाती है और व्यक्ति 7 से 8 फीट लंबा हो जाता है। 

समान वृद्धि रुकने के बाद जब वृद्धि हार्मोन का स्राव होता है तो एक्रोमेगली नामक स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसमें अस्थिया लंबाई में ना बढ़कर मोटी और खुरदरी हो जाती हैं।

स्तन प्रेरक या दुग्ध जनक हार्मोन (Prolactin Or Lactogenic Hormone): 

स्त्रियों में प्रोलैक्टिन के दो कार्य होते हैं-
1-ईस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के साथ मिलकर गर्भावस्था के दौरान स्तनों में नलियों को विकसित करता है।
2-प्रसव के उपरांत दूध उत्पादन को प्रेरित करता है।

अधिवृक्क-प्रांतस्थाप्रेरक या एड्रेनोकॉर्टिकोट्रॉपिक हार्मोन (Adrenocorticotropic Hormone – ACTH): 

यह हार्मोन एड्रिनल ग्रंथि के कॉट्रेक्स को उद्दीप्त करता है और उसमे रक्त प्रवाह को बढ़ाता है इससे एड्रिनल कॉट्रेक्स से स्टेरॉयड हार्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है। तथा विशेष रूप से कॉर्टिसॉल की निकासी बढ़ जाती है इसके अतिरिक्त ATCH  मैलेनिन के उत्पादन में भी प्रभावी है।

इस हार्मोन की कमी से एड्रिनल ग्रंथि का कार्य क्षमता घट जाती है, और त्वचा पीली हो जाती है, इस हार्मोन की अधिकता होने पर कुशिंग रोग हो जाता है, जिससे अधिक रक्त प्रभाव होने के कारण चेहरे की रक्त वाहिनियाँ  फूली हुई दिखाई देती है। असामान्य स्थानों पर बाल उग आते हैं, त्वचा पतली हो जाती है, आंतरिक रक्तस्राव के कारण त्वचा पर नीला पड़ जाता है।

थाइरॉयड उद्दीपक हार्मोन (Thyroid Stimulating Hormone- TSH):

यह हार्मोन थाइरॉयड ग्रंथि की वृद्धि और उसकी क्रियाशीलता को उद्दीप्त करता है, जिससे थाइरॉक्सिन (Thyroxine-T4) तथा ट्राईआयडोथाइरोनीन हार्मोन स्रावित होते हैं। 

जब रक्त में  T3 व् T4 हार्मोन अधिक हो जाते हैं, तो TSH का स्राव कम हो जाता है, और जब रक्त में T3 व् T4 हार्मोन कम हो जाते हैं तो TSH का स्राव बढ़ जाता है। 

TSH की मात्रा कम होने पर हाइपोथायरायडिज्म हो जाता है, इससे शरीर में कमजोरी आ जाती है ठंड सहन नहीं होती है, त्वचा शुष्क हो जाती है, और बाल झड़ने लगते हैं, वृद्धि की कमी हो जाती है, पेशियां और जोड़ों में दर्द होता है, रक्ताल्पता हो जाती है, सुनाई कम देता है। 

स्त्रियों में मासिक रक्तस्राव अधिक होता है बच्चों में क्रेटिनिज्म नामक रोग हो जाता है TSH की अधिकता से हाइपर हाइपोथायरायडिज्म या गलगंड हो जाती है जिसमें नेत्रोधी हो जाता है । इसमें थायराइड ग्रंथि बढ़ जाती है और नेत्रगोलक बाहर निकल आते हैं।

जनन ग्रंथि पोषक या गोनाडोट्राफिक हार्मोन (Gonadotropic Hormone):

स्त्री और पुरुष दोनों में अग्रज पीयूष ग्रंथि से निम्न दो जनन ग्रंथि पोषक उत्पन्न होते हैं।
लूटिनाइज़िंग हॉर्मोन- स्त्रियों में है एक अस्थाई अंतःस्रावी ऊतक-कार्पस ल्यूटियम का निर्माण होता है, जो इस्त्री सेक्स हार्मोन प्रोजेस्टेरोन एवं एस्ट्रोजन का स्राव करता है।

 LH डिंबोत्सर्जन को उद्दीप्त करता है जिसमें प्रत्येक माह डिंबाशय से परिपक्व अंडे का क्षरण होता है। LH पुरुषों में शुक्रग्रंथियों में अंतरालिया कोशिकाओं को उदित करता है। जिससे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन उत्पन्न होता है। LH की कमी से हाइपोगोनेडिज्म तथा बंध्यता उत्तपन्न हो जाती है LH की अधिकता से कालपूर्व यौवनारम्भ  होता है।

फॉलिकल्स उददीपक हार्मोन (Follicle-stimulating Hormone- FSH):

स्त्रियों में प्रत्येक मासिक चक्र के दौरान ओवेरियन फॉलिकल्स की विधि एवं उनकी परिपक्वता को उद्दीप्त करता है, या ओवेरियन फॉलिकल्स को एस्ट्रोजन हार्मोन प्रभावित करने के लिए भी प्रेरित करता है। FSH पुरुषों में वृषणों की शुक्राणु जनक कोशिकाओं को उदित करता है। जिससे शुक्राणुओं की उत्पत्ति होती है साथ ही यह शुक्राणुओं  के निर्माण को भी नियंत्रित करता है।

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